Tuesday, 23 December 2014
धर्म
धर्म भीतर की आध्यात्मिक ता को थाम के रखता है । धर्म एक ही होता है पर संप्रदाय कइ होते है । हर संप्रदाय अलग अलग भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर मानव समाज के हीतो की रक्षा के लीए बनाए जाते है । पर संप्रदाय के और समाज के रक्षक ही उसके भक्षक बन गए है । समाज सुधारक के रुप में आज के नेता उसके ठेकेदार बन गए है । पैसा,सत्ता और ताक़त के जोर पर नेता संप्रदायों के कमज़ोर वर्गों को लालच देकर संप्रदाय परीवर्तन करने को मजबूर करते है । जो काम पहले अंग्रेज़ और फीर मुग़ल कीया करते थे आज वह हमारे ही चुनें हुए कुछ नेता करते है । ऐसे भी संप्रदाय अपने भारत देश में है,जो संविधान के तहत मौलिक अधिकार का लाभ जरुर उठाते है पर संविधान के कानुन के डायरे से बाहर है । और ख़ुद के संप्रदाय के कानुन बनाकर चलते है । केवल स्वार्थ ही जीसका धर्म है ऐसे नेता उसकी रक्षा करते आए हैं । मेरा नेताओं से निवेदन है की संप्रदायों के युध्ध को छोड़ देश के विकास की और ध्यान दे । धर्म अपनी रक्षा करना जानता है और हर युग मैं उसका रक्षक हाजीर रहता है ।
Thursday, 17 July 2014
Mother
Unknowingly mother taught us three things:- tolerance,patience, and forgiveness and this are the first steps of spiritual path
Tuesday, 1 July 2014
धार्य ते इती धर्म
जीसने सत्य के मर्म को धारण कीया है वह धर्म है । जो कीसी आदर्श पर नहीं टीक पाते वह हर आकर्षण पर गीरते है । केवल धर्म ही है जो हमें धारण करता है और सत्य के मार्ग पर टीकाता है ।
साक्षी भाव
जीवन में कुछ ना कुछ बनने की दौड़ लगी रहती है ।कुछ बन जाने के बाद उसे खोने का डर रहता है । यह जीवन कुछ खोने और कुछ पाने के चक्कर में बीत जाता है । और अपना अहंकार ही कुछ पाने में ख़ुशी देता है और खोने में ग़म देता है ।आत्मा न कुछ खोता है न कुछ पाता है वह तो साक्षी भाव से सबकुछ देखता रहता है । जब हम याने मन रुपी अहंकार इस आत्मरुप के साथ एक हो जाता है तब मन की दौड़ भी शांत हो जाती है ।
जबतक मनरुपी जल में ऊद्वेग रुपी कंकर पड़ते रहेंगे तबतक अपना मन अशांत ही रहेगा । पर जैसे ही जल शांत होता है तब वह बाहर का प्रतीबींब दीखाता है और भीतर भी पारदर्शी रहता है ।
Saturday, 28 June 2014
ये अंग तेरा
ये अंग तेरा है,ये संग तेरा है ।ये दीया हुआ रुपरंग भी तेरा है ।सबकुछ तेरा है फीर भी जीवन में अंधेरा है । क्यों की जीवन में अहंकार काबसेरा है । ऐ दोस्त करदे अपने प्रेमरुपि ज्ञान को उजागर फीर देख हर सवेरा भी तेरा है ।
In your heart
I am always there with you in your heart,because I am part of your heart. You just remember me when ever you need me. Just close your eyes and listen to your heart, because I am part of your heart. You love your self as much as you love me because I part of your heart
Saturday, 31 May 2014
Time
The day when you know the value and importance of others time at that time, time evaluet your time
SPIRITUALITY :-Utility of your spirit for others growth that is spirituality
Subscribe to:
Comments (Atom)